युविका (YUVIKA) 2026
युविका का पूरा नाम 'युवा विज्ञानी कार्यक्रम' (Young Scientist Programme) है। इसरो ने इस विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा "Catch them young" (उन्हें छोटी उम्र में ही प्रेरित करें) के उद्देश्य से तैयार की है। इसका मुख्य लक्ष्य उभरते हुए छात्रों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology), अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों (Space Applications) की बुनियादी जानकारी देना है।
मुख्य उद्देश्य
छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
इसरो के विभिन्न केंद्रों पर जाकर वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने और अत्याधुनिक उपकरणों को देखने का अवसर प्रदान करना।
भारत की भावी पीढ़ी को अंतरिक्ष अनुसंधान की चुनौतियों और संभावनाओं से अवगत कराना।
पात्रता और कार्यक्रम विवरण
कौन आवेदन कर सकता है?: वे छात्र जो 1 जनवरी, 2026 तक भारत के किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 9 में अध्ययनरत हैं।
यह आमतौर पर मई के महीने में आयोजित होने वाला 2 सप्ताह का आवासीय (Residential) कार्यक्रम है।
छात्रों का चयन उनकी पिछली कक्षाओं (कक्षा 8) के अंकों, ऑनलाइन क्विज़, विज्ञान प्रतियोगिताओं और खेल-कूद जैसी गतिविधियों में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को इसमें विशेष प्राथमिकता (वेटेज) दी जाती है।
1. चयन प्रक्रिया (Selection Criteria)
इसरो ने चयन के लिए एक पारदर्शी प्रणाली बनाई है। कुल 100 अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है:
कक्षा 8 के अंक (50%): आपकी पिछली कक्षा के परिणाम का सबसे अधिक महत्व है।
ऑनलाइन क्विज़ (10%): पंजीकरण के समय एक ऑनलाइन विज्ञान प्रश्नोत्तरी आयोजित की जाती है।
विज्ञान प्रतियोगिताएं (10%): यदि आपने पिछले 3 वर्षों में जिला/राज्य/राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रतियोगिता या प्रदर्शनी में भाग लिया है।
ओलंपियाड/प्रतियोगी परीक्षा (10%): विज्ञान या गणित ओलंपियाड में स्थान प्राप्त करने पर।
खेल-कूद/एनसीसी/एनएसएस (10%): यदि आप स्कूल की खेल टीम का हिस्सा रहे हैं या NCC/NSS के सदस्य हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के छात्र (10%): जो छात्र ग्रामीण क्षेत्रों (Panchayat area) के स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उन्हें इसरो 15% का विशेष वेटेज देता है ताकि उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिले।
कार्यक्रम के दौरान क्या होता है?
चयनित छात्रों को भारत के विभिन्न इसरो केंद्रों (जैसे- बेंगलुरु, तिरुवनंतपुरम, अहमदाबाद, श्रीहरिकोटा आदि) में से किसी एक पर भेजा जाता है।
वहाँ वे वैज्ञानिकों के व्याख्यान सुनते हैं।
लैब और रॉकेट लॉन्च पैड देखते हैं।
छोटे प्रयोग और मॉडल बनाने की गतिविधियों में भाग लेते हैं।